Type of sales:-



वैसे तो सेल के बहुत से तरीके हैं जिनके द्वारा क्रय विक्रय  किया जाता है परंतु उनमें से 5 तरीके काफी असरदार है और अधिकतर सेल इन्हीं 5 तरीकों के द्वारा किया जाता है ये  5 तरीके निम्नांकित है:-

1). Natural sale(प्राकृतिक बिक्री):-



 प्राकृतिक बिक्री में ग्राहक अपनी आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए दुकानदार के पास जाता है और अपनी वस्तु को पैसे देकर खरीद लेता है इस प्रकार के  क्रय -विक्रय में जरूरत की वैसी  वस्तुएं आती हैं जो हमारे आम जीवन में व्यवहार होती हैं जैसे राशन की वस्तुएं ,सब्जियां,फल ,मांस- मछली  इत्यादि इन वस्तुओं की खरीद के लिए ग्राहक को स्वयं विक्रेता के पास जाना पड़ता है और  वस्तु को क्रय कर घर ले जाना होता है ।

2). Door to Door sale(डोर टू डोर बिक्री):-



इस सेल्स के तरीके में ग्राहक की जगह विक्रेता या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति ग्राहक के घरों पर जाकर अपने उत्पाद के बारे में जानकारी देते हैं और अपने उत्पाद को ग्राहक को बेचने की कोशिश करते  हैं या अपने उत्पाद को खरीदने के लिए ग्राहक को  प्रोत्साहित करते हैं यदि ग्राहक को उत्पाद पसंद आता है तो  उस परिस्थिति में ग्राहक पैसे देकर  उस उत्पाद को खरीद लेता है सेल  के इस तरीके में वे  वस्तुएं आती है जो मार्केट में नई हैं या  जिनकी कोई पहचान नहीं  है  वह अपनी पहचान बनाने के लिए या  अपने उत्पाद को बेचने के लिए ग्राहकों तक खुद पहुँचते  हैं और मार्केट में अपनी एक पहचान बनाने की कोशिश करते हैं ।

3).Convince sale(बिक्री के लिए मनाना):-



इस विधि में विक्रेता अपनी वस्तु को बेचने के लिए ग्राहक को कन्वींस करता है इस विधि में ग्राहक कस्टमर के घर जाकर या फोन पर ग्राहक को अपने प्रोडक्ट के बारे में बताता है और उसे उस वस्तु को खरीदने के लिए तैयार करता है जब ग्राहक वस्तु खरीदने के लिए तैयार हो जाता है उस परिस्थिति में ग्राहक को विक्रेता या विक्रेता का सेल्समैन शोरूम पर लाता है और प्रोडक्ट को दिखाता है प्रोडक्ट पसंद आ जाने पर ग्राहक पैसे देकर या फाइनेंस के द्वारा उस वस्तु को खरीद लेता है।  इसमें एग्रीकल्चर से संबंधित उपकरण जैसे ट्रैक्टर और ट्रैक्टर के साथ व्यवहार होने वाले उनके उपकरण आते हैं इसके साथ साथ बीमा क्षेत्र से जुड़ी  हुई  सेवाएं भी इसमें आती है । 

4). Network sale(नेटवर्क से बिक्री):-



बिक्री के इस प्रकार में ग्राहक और विक्रेता एक ही होते हैं  इसमें ग्राहक या विक्रेता अपने नीचे दो या दो से अधिक व्यक्तियों को जोड़ते हैं उसके बाद उस ग्राहक या विक्रेता के नीचे जुड़े दो या दो से अधिक व्यक्ति अपने नीचे दो या दो से अधिक व्यक्तियों को जोड़ते हैं और इस तरह से यह सिलसिला चलता रहता है और एक लंबी मानव शृंख्ला सी  तैयार हो जाती है।  अब यह जिस कंपनी के से जुड़े हुए हैं उसके प्रोडक्ट को खरीदते हैं इसके एवज में उन्हें एक कमीशन दिया जाता है चूँकि कमीशन या  आउट खुद की खरीदारी के साथ-साथ अपने नीचे जुड़े हुए जितने भी ग्राहक या विक्रेता है उनकी खरीदारी पर भी मिलता इसके कारण  धीरे धीरे उनका इनकम बढ़ता चला जाता है। 

5).Online sale(ऑनलाइन बिक्री):-



बिक्री की का यह प्रकार आज के समय में काफी प्रचलित होता चला जा रहा है। हर कोई ऑनलाइन वस्तुओं को खरीदने के लिए तत्पर है।  इसका कारण यह है की ग्राहक को बिना किसी दुकान पर गए  घर पर उन  वस्तु को का उपलब्ध हो जाना है जिसकी उसे जरुरत है  इसमें ग्राहक वस्तु को इंटरनेट के माध्यम से गूगल पर या दूसरे सर्च इंजन पर जाकर सर्च करता है या ऑनलाइन सेल करने वाले साइट पर जाकर उस प्रोडक्ट के बारे में जानकारी लेता है प्रोडक्ट को देखता है और प्रोडक्ट पसंद आ जाने पर उस प्रोडक्ट को अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड , इंटरनेट बैंकिंग के द्वारा या  कैश ऑन डिलीवरी के माध्यम से वस्तु को खरीद  लेता है  और 7 से 10 दिनों के भीतर उसके पास वह वस्तु सही सलामत पहुंच जाती है ऑनलाइन सेल में ग्राहक को उत्पाद  उत्पाद नहीं पसंद आने की परिस्थिति में मनी बैंक की गारंटी भी विक्रेता के द्वारा दी जाती है जोकि ग्राहक को ऑनलाइन सेल की तरफ आकर्षित करती है इस सेल की विधि में लगभग वे  सारी वस्तुएं आती है जिनको हम ऊपर की विधियों में पढ़ चुके। सभी वस्तुओं को ऑनलाइन के माध्यम से खरीद सकते हैं उदाहरण के तौर पर राशन की वस्तुएं ,मोबाइल फोन, टीवी ,फ्री ,घर में व्यवहार बनने वाली वस्तुएं ,जीवन विमा आदि। यदि कोई आवश्यक बिंदु छूट गई हो कृपया कमेंट करें । लेख से संबंधित वीडियो देखने के लिए कृपया लिंक को👉 क्लिक करें।आशा करता हूं लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद🙏:- Mritunjay Pathak